नई दिल्ली | ABN News — क्या आपने कभी सोचा है कि एक शख्स जो IIT और IIM से पढ़ा हो, करोड़ों का बिज़नेस खड़ा करे और फिर अचानक सब कुछ खो दे? यही हुआ R. सुब्रमण्यम के साथ, जो कभी रिटेल दिग्गज ‘सुभिक्षा’ के संस्थापक थे, लेकिन अब चेन्नई की विशेष अदालत ने उन्हें 20 साल जेल की सजा सुनाई है।

शुरुआत से गिरावट तक
सुब्रमण्यम ने 1991 में ‘विश्वप्रिय’ नाम की कंपनी शुरू की थी, जो वित्तीय सेवाएं देती थी। आकर्षक योजनाओं ने निवेशकों का ध्यान खींचा और जल्दी ही पैसा बरसने लगा।
1997 में उन्होंने ‘सुभिक्षा’ रिटेल चेन की नींव रखी, जो देशभर में 1,600 से ज़्यादा स्टोर्स तक फैल गई। यह उस दौर की सबसे तेजी से बढ़ने वाली रिटेल कंपनियों में गिनी जाती थी।
धोखाधड़ी का जाल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैकड़ों निवेशकों का पैसा कई शेल कंपनियों के जरिए गायब कर दिया गया। 587 निवेशकों को आज तक उनका पैसा वापस नहीं मिला है।
पिछले 10 सालों में सुब्रमण्यम ने कोई स्वैच्छिक जमा नहीं किया, जबकि जमाकर्ताओं को ₹137 करोड़ से ज्यादा का बकाया था।

अदालत का कड़ा फैसला
20 नवंबर 2023 को अदालत ने सुब्रमण्यम को 20 साल जेल की सजा के साथ ₹8.92 करोड़ का जुर्माना लगाया।
इसके अलावा दोषी संगठनों पर ₹191.98 करोड़ का जुर्माना भी ठोका गया, जिसमें से ₹180 करोड़ प्रभावित जमाकर्ताओं को मुआवजा देने के लिए तय किया गया है।
कभी सफलता का चेहरा, आज सज़ा का प्रतीक
IIT और IIM की डिग्री, बैंकर से लेकर रिटेल किंग तक का सफर, और फिर जेल की सलाखों के पीछे… R. सुब्रमण्यम की कहानी इस बात का सबक है कि गलत रास्ते पर मिली सफलता हमेशा टिकती नहीं।