लातूर में स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे की पूर्णाकृति प्रतिमा का अनावरण मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों किया गया। इस मौके पर राज्य की मंत्री पंकजा मुंडे ने अपने पिता की याद में भावुक भाषण दिया।
उन्होंने कहा, “मुंडेसाहेब ने जीवनकाल में ही मुझे अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। यह विरासत सिर्फ संपत्ति या पैसों की नहीं, बल्कि विचारों और मूल्यों की थी। मेरे पिता मेरे गुरु थे। उन्होंने मुझे सीधे-सीधे यह नहीं बताया कि क्या करना है, लेकिन हमेशा यह सिखाया कि क्या नहीं करना चाहिए।”
पंकजा मुंडे ने बताया कि इस विरासत के साथ संघर्ष और साजिशें भी उनके हिस्से में आईं, लेकिन उन्होंने कभी अपना स्वाभिमान नहीं खोया। “किसी के फेंके टुकड़े मत उठाओ, हालात के आगे मत झुको और किसी से द्वेष मत रखो” — यह सीख उनके पिता ने दी थी।
उन्होंने आगे कहा, “मुंडेसाहेब हमेशा जोड़ने की राजनीति करने की सलाह देते थे और इसी वजह से हम आज सत्ता में हैं। उन्होंने मुझे कहा था कि तुम्हें गोपीनाथ मुंडे बनना है, लेकिन उसका बेहतर संस्करण बनना है। मैंने उनसे वादा किया था कि मैं स्वाभिमान के साथ राजनीति करूंगी और इस वादे से कभी पीछे नहीं हटूंगी।”
भाषण में पंकजा मुंडे ने देवेंद्र फडणवीस के प्रति आभार भी जताया। उन्होंने याद किया कि, “पापा के निधन के समय जब मैं दिल्ली पहुंची, तो वहां पहचान का कोई चेहरा नहीं था, सिर्फ देवेंद्र फडणवीस खड़े थे। उस समय मेरी आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे।”
कार्यक्रम के अंत में पंकजा मुंडे ने स्पष्ट किया कि गोपीनाथ मुंडे की विरासत सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि लोगों से जुड़ी, ईमानदारी और सेवा भावना से भरी हुई है, जिसे वह हमेशा निभाती रहेंगी।